
घटक दलों के महत्वाकांक्षी नेताओं से करना होगा समझौता
भाजपा को बहुमत न मिलना उत्तराखंड के लिए निराशाजनक
DEHRADUN: lalit Uniyal
लोकसभा चुनाव के बाद तस्वीर लगभग साफ हो चुकी है। स्पष्ट है कि एनडीए गठबंधन को बहुमत प्राप्त हुआ है लेकिन एनडीए की सबसे बड़ी पार्टी भारतीय जनता पार्टी इस बार अपने अकेले के बूते पर बहुमत (272) के आंकड़े से कहीं पीछे रह गई। भाजपा की ओर से दावा किया गया था 400 से अधिक सीटें प्राप्त करने का, लेकिन एनडीए 297 सीटों के आंकड़े पर सिमटती हुई नजर आई है तो वही इंडिया गठबंधन ने 231 सीट लेकर इस बार चुनावों की पूरी तस्वीर ही बदल डाली है।
पिछले दो लोकसभा चुनावों की तरह इस बार भी उत्तराखंड में भारतीय जनता पार्टी को टक्कर देने की हैसियत किसी पार्टी में नजर नहीं आई और यहां तीसरी बार भाजपा ने 5-0 की हैट्रिक लगाकर बता दिया कि उत्तराखंड आज भी भारतीय जनता पार्टी का गढ़ है, और यहां उसके घर को तोड़ना आसान नहीं है। इस उत्साह जनक एवं शत प्रतिशत परिणाम के बावजूद उत्तराखंड के लिए वर्तमान लोकसभा चुनाव परिणाम कहीं ना कहीं एक निराशा पैदा करने वाले भी लग रहे हैं। अतीत पर नजर डालें तो अब तक की भाजपा की पूर्ण बहुमत वाली सरकारों में उत्तराखंड को एक प्रभावपूर्ण स्थान केंद्र में मिला है लेकिन इस बार उत्तराखंड से किसी सांसद को कैबिनेट या फिर राज्य मंत्री के तौर पर स्थान मिल पाएगा इसकी दूर-दूर तक संभावनाएं नजर नहीं आ रही है। इसका महत्वपूर्ण कारण यह है कि यदि एनडीए सब कुछ नियंत्रण में रखते हुए तीसरी बार अपनी सरकार बनाने में कामयाब होती है तो यहां सरकार पूरी तरह से गठबंधन के भरोसे ही बनेगी और सरकार के टिके रहने की “गारंटी” घटक दलों के पास होगी। इस गठबंधन में सहयोगी दलों के नेताओं को मंत्रिमंडल में जगह देना सरकार बनाने के समझौते के रूप में शामिल किया जा सकता है। घटक दलों में महत्वाकांक्षी नेताओं की भरमार है, जिन्हें पूरा करना एनडीए सरकार के चुने जाने वाले प्रधानमंत्री के लिए भी एक बड़ी चुनौती होगी। चुंकी बीजेपी बहुमत में नहीं है लिहाजा केंद्रीय मंत्रिमंडल या राज्य मंत्री बनाने के फैसले पर प्रधानमंत्री का एकतरफा जोर चल पाएगा इसकी उम्मीदें अब कम ही नजर आ रही है।
देवभूमि उत्तराखंड को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कार्यकाल हो या फिर स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेई का, हमेशा केंद्रीय मंत्रिमंडल में एक प्रभावशाली हिस्सेदारी दी गई है। मेजर जनरल भुवन चंद खंडूरी, बच्ची सिंह रावत, अजय भट्ट एवं डॉ रमेश पोखरियाल निशंक जैसे कुछ नाम इस फेहरिस्त में शामिल रहे हैं।
उत्तराखंड की जनता एवं बीजेपी द्वारा एनडीए गठबंधन को उत्तराखंड से 5 सीटों का तोहफा देने के बावजूद भी नई सरकार में इस बार मंत्रिमंडल में स्थान मिलना बेहद मुश्किल नजर आने लगा है। चुनाव परिणाम आने से पूर्व उम्मीद की जा रही थी की पूर्व राज्यसभा सांसद अनिल बलूनी को मोदी सरकार में एक अच्छा खासा पोर्टफोलियो सौंपा जा सकता है, लेकिन अब इन उम्मीदों पर भी संशय के बादल ही मंडराते नजर आने लगे हैं।