शोरूम/ ज्वैलरी शॉप संचालकों द्वारा सुरक्षा मानकों की लगातार की जा रही अनदेखी
कड़वा सच: संभव नहीं है हर दुकान पर पुलिस कर्मियों को लगाया जाना
आखिर देश भर में विभिन्न राज्यो पर रिलायंस ज्वैलरी शोरूम में क्यों हो रही लूट की वारदातें?
Dehradun: प्रदेश भर के बड़े ज्वेलरी शोरूम दिखावे की सुरक्षा व्यवस्था के बीच संचालित किया जा रहे हैं। देहरादून के रिलायंस ज्वैलरी शोरूम में हुई लूट की घटना के बाद ऐसे संस्थानों द्वारा अपने कीमती सामान की सुरक्षा के लिए जो सुरक्षा के मापदंड अपनाए जा रहे हैं वह संतुष्ट करने वाले नहीं है। शायद निजी संस्थाओं ने अपने कीमती सामान की जिम्मेदारी का ठीकरा भी प्रादेशिक सुरक्षा एजेंसियों के भरोसे छोड़कर खुद चैन की बंसी बजाने की ठान ली हैं।
राजधानी देहरादून में ही ऐसे ज्वेलरी शॉप एवं शोरूम की कमी नहीं है जहां सुरक्षा को लेकर बुनियादी बातों की पूरी तरह से अनदेखी की जा रही है। अधिकांश शोरूम में तो सुरक्षा गार्ड तक नहीं है, जबकि नामी गिरामी मल्टीनेशनल कंपनियों के ज्वेलरी शोरूम में अलार्म तक नहीं पाए गए हैं। राजधानी देहरादून के रिलायंस ज्वैलरी शोरूम में हुई लूट की घटना के बाद ऐसे संस्थानों द्वारा अमल में लाए जाने वाले सुरक्षा प्रबंधन पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं, जिसकी पुलिस को गंभीरता से जांच करनी चाहिए।

सवाल यह उठता है कि आखिर क्यों यह संस्थान महज सीसीटीवी के भरोसे पुख्ता सुरक्षा होने की बात मान लेते हैं जबकि करोड़ों रुपए का माल दुकान में होने के बावजूद सशस्त्र गार्ड रखने की कोशिश ही नहीं की जाती। क्या इसके पीछे इंश्योरेंस क्लेम का खेल तो नहीं या फिर सब कुछ पुलिस के भरोसे छोड़कर खुद लाखों करोड़ों के वारे न्यारे करने के प्रपंच रचा जा रहा हैं। यह जिम्मेदारी सीधे तौर पर ज्वेलरी शॉप हो या फिर दूसरे अन्य शोरूम, वह अपने प्रतिष्ठानों में सुरक्षा के व्यापक प्रबंध व्यवस्थित रखें। सब कुछ पुलिस के भरोसे छोड़कर चलना समझदारी नहीं है क्योंकि मौके पर उठाया गया कदम कई बार दुकान या शोरूम की सुरक्षा में लाभकारी साबित होता है।
यह बात भी गले नहीं उतरती की आखिर क्यों देश भर में रिलायंस के शोरूम ही क्यों निशाने पर लिए जा रहे हैं? आखिर इस गिरोह को रिलायंस शोरूम में ऐसा क्या “लूज पॉइंट” मिल गया कि उसे यहां लूट करने में अब बच्चों का खेल नजर आने लगा है। आखिर क्यों लगातार हो रही घटनाओं के बावजूद भी सुरक्षा के मानकों की अनदेखी की जा रही है?
समाज की सुरक्षा व्यवस्था आपसी सहयोग से ही संचालित होती है और निश्चित तौर पर सब कुछ पुलिस के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता। कुछ जिम्मेदारियां आम नागरिकों एवं कारोबारियों की भी है। यह समझना बेहद जरूरी है कि क्या शोरुम / ज्वैलरी शॉप संचालकों को स्वयं की भी जिम्मेदारी समझते हुए सुरक्षा के समुचित प्रबंध सुनिश्चित नहीं करने चाहिये ? एक तरफ बड़े संस्थानों द्वारा खुद सुरक्षा मानकों की अनदेखी की जा रही है तो दूसरी तरफ घटना के बाद पुलिस प्रबंधन को कटघरे में खड़ा किया जा रहा है।
पुलिस किसी भी घटना के बाद विवेचना का कार्य शुरू करती है और जितना भी फीडबैक अब तक डकैती की इस घटना में देहरादून पुलिस ने अर्जित किया है वह घटना के खुलासे की ओर ही ले जाता हुआ फिलहाल नजर आ रहा है।
आने वाले दिनों में निश्चित तौर पर पुलिस डकैतों को गिरफ्तार करेगी लेकिन यहां पुलिस तंत्र को भी ऐसे संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए जो सुरक्षा मानकों की अनदेखी करते हैं। बड़े-बड़े संस्थानों को एनओसी जारी करने से पहले केवल अब यह तय करना अनिवार्य कर देना चाहिए कि आपराधिक वारदात के दौरान संस्थाओं द्वारा किस प्रकार के प्रबंध किए गए हैं?