एसएसपी कार्यालय में कांग्रेस के विरोध के तरीके पर मुखर हुए पुलिस संगठन – Bhilangana Express

एसएसपी कार्यालय में कांग्रेस के विरोध के तरीके पर मुखर हुए पुलिस संगठन


नैनीताल में कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा 8 अगस्त को वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कार्यालय में रैली के वाहनों को रोकने के विरोध स्वरूप अभद्र व्यवहार पर उत्तराखंड आईपीएस ऑफिसर एसोसिएशन, पीपीएस ऑफिसर संगठन एवं पुलिस पेंशनर कल्याण समिति ने गहरी आपत्ति दर्ज की है और कहा कि इस प्रकार का व्यवहार अशोभनी है।

लोकतंत्र में विरोध और असहमति व्यक्त करना प्रत्येक राजनीतिक दल का अधिकार है। किसी भी मुद्दे पर सरकार, प्रशासन या पुलिस के विरुद्ध अपनी बात रखना लोकतांत्रिक व्यवस्था की एक महत्वपूर्ण विशेषता है किंतु जब विरोध प्रदर्शन मर्यादा की सीमाओं को पार कर अभद्रता, धमकी या अनुशासनहीनता का रूप लेने लगे, तब यह लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करने का कार्य करता है

नैनीताल में कांग्रेस पार्टी के कुछ कार्यकर्ताओं द्वारा वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) कार्यालय में घुसकर कथित रूप से अभद्र व्यवहार किए जाने की घटना ने राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर अनेक प्रश्न खड़े कर दिए हैं। यदि किसी जनप्रतिनिधि या राजनीतिक दल को पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर आपत्ति है, तो उसके लिए ज्ञापन, वार्ता, धरना-प्रदर्शन और न्यायिक प्रक्रिया जैसे अनेक लोकतांत्रिक माध्यम उपलब्ध हैं लेकिन किसी सरकारी कार्यालय में जाकर अधिकारियों के साथ असम्मानजनक व्यवहार करना न केवल प्रशासनिक व्यवस्था को प्रभावित करता है, बल्कि जनता के बीच भी गलत संदेश पहुंचाता है।

लोकतंत्र में विरोध और असहमति व्यक्त करना प्रत्येक राजनीतिक दल का अधिकार है। किसी भी मुद्दे पर सरकार, प्रशासन या पुलिस के विरुद्ध अपनी बात रखना लोकतांत्रिक व्यवस्था की एक महत्वपूर्ण विशेषता है किंतु जब विरोध प्रदर्शन मर्यादा की सीमाओं को पार कर अभद्रता, धमकी या अनुशासनहीनता का रूप लेने लगे, तब यह लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करने का कार्य करता है।

पुलिस प्रशासन कानून-व्यवस्था बनाए रखने का कार्य करता है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में पुलिस की निष्पक्षता और गरिमा बनाए रखना आवश्यक है। राजनीतिक दलों को भी यह समझना चाहिए कि उनके कार्यकर्ताओं का आचरण समाज के लिए उदाहरण प्रस्तुत करता है। जब सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोग नियमों और शिष्टाचार की अनदेखी करते हैं, तो आम नागरिकों में भी व्यवस्था के प्रति सम्मान कम होने लगता है।

नैनीताल की यह घटना राजनीतिक दलों के लिए आत्ममंथन का विषय है। लोकतंत्र में संघर्ष और विरोध आवश्यक हैं, लेकिन उनका स्वरूप सभ्य, शांतिपूर्ण और संविधान सम्मत होना चाहिए।