मास की पूर्णिमा से लेकर अश्विन मास की अमावस्या तक पितृ पक्ष या महालय श्राद्ध पक्ष कहा जाता है ।आश्विन मास के पंद्रह दिन पितृ पक्ष के नाम से विख्यात हैं।इस दौरान श्रद्धा से अपने पितरों को जल,दूध आदि से तर्पण करने चाहिए ।यमस्मृति में पांच प्रकार के श्राद्धों का उल्लेख मिलता है–नित्य श्राद्ध,नैमित्तिक श्राद्ध,काम्य श्राद्ध,वृद्धि श्राद्ध,ॵर पार्वण श्राद्ध।
👉प्रतिदिन किये जाने वाले श्राद्ध को नित्य श्राद्ध कहते हैं।इसमें विश्वेदेवा की आवश्यकता नहीं होती है।
👉एकोदिष्ट श्राद्ध को नैमित्तिक श्राद्ध कहते हैं ।इसमें भी विश्वेदेवा नहीं होते हैं👉किसी भी प्रकार की कामना पूर्ती के निमित किये जाने वाले श्राद्ध को काम्य श्राद्ध कहते हैं ।
👉संतान उत्पन्न तथा विवाह आदि मांगलिक कार्यों में जो श्राद्ध किया जाता है उसे नान्दी श्राद्ध या वृद्धि श्राद्ध कहते हैं ।
👉पितृ पक्ष या आमावश्य पर किये जाने वाले श्राद्ध को पार्वण श्राद्ध कहते हैं ।
👉पितृ पक्ष में मृत व्यक्ति की जो तिथि आए उसी तिथि पर श्राद्ध या पार्वण श्राद्ध करना चाहिए ।
👉बन्धुओं पितृ पक्ष नित्य कर्म करने के बाद पितरों का श्राद्ध तर्पण करना चाहिए ।जिस हमें अपने पितरों का श्राद्ध तर्पण करना है उस दिन हमें निम्न कार्य नहीं करना चाहिए ।काला वस्त्र दान न करें और नाहीं काले कपड़े पहनें।🌻श्राद्ध तर्पण के दिन लोहा का दान न करें ।🌻अपना झूठा व वासी भोजन किसी को भी नहीं दें।🌻तेल का दान न करें जहां तक हो सके घी का दान करें ।🌻पितृ पक्ष में शराब मांस न खायें ऐसा करने पर पितृ रुष्ट होते हैं और पितृ दोष होता है।🌻पितृ पक्ष में कोई भी शुभ कार्य न करें ।🌻किसी भी प्राणी का अपमान न करें ।🌻सदैव प्रसन्न मुद्रा में रहें।🌻पितरों हर वक्त स्मरण करें।🌻पीपल,वरगद की पूजा करें।प्रत्येक दिन प्रातः भोजन के समय एक निवाला पितरों के निमित निकालें।🌻श्राद्ध श्रद्धा से करें।🌻पितृ दोष से मुक्ति के लिए मृत्यु तिथि अनुसार श्राद्ध तर्पण करना चाहिए ।🌻पितृ पक्ष में जहां तक हो सके सफेद वस्त्र पहनें लाल काला बिल्कुल नहीं ।🌻श्राद्ध के दिन गौ श्वान और काक को भोजन करायें।
साभार
(🌹🙏प० प्रकाश उनियाल🙏🌹)