सस्पेंड सिपाही शेर सिंह के कथित ‘इस्तीफे’ पर उठा विवाद, IG कुमाऊं निवेदिता कुकरेती ने खोले राज
बड़ा सवाल गंभीर अपराधों में था लिप्त तो क्यों नहीं हुआ बर्खास्त
जंतर मंतर पर चल रहे आंदोलन में उत्तराखंड पुलिस के निलंबित सिपाही शेर सिंह के “इस्तीफे” को लेकर सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं के बीच कुमाऊं रेंज की आईजी निवेदिता कुकरेती ने स्पष्ट किया है कि शेर सिंह वर्ष 2025 से ही एक गंभीर आपराधिक मामले में निलंबित चल रहा है और वह सक्रिय पुलिस सेवा में नहीं है।
आईजी द्वारा जारी बयान के अनुसार, शेर सिंह के विरुद्ध थाना गंगनहर, जनपद हरिद्वार में वर्ष 2025 में मुकदमा संख्या 415/2025 दर्ज किया गया था। इस मामले में उसके खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी, फर्जी दस्तावेज तैयार करने, आपराधिक साजिश सहित भारतीय दंड संहिता एवं भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत कार्रवाई की गई।
पुलिस जांच में सामने आया कि हरिद्वार-रुड़की क्षेत्र के कुख्यात गैंगस्टर प्रवीण वाल्मीकि के आपराधिक गिरोह में शेर सिंह की सक्रिय भूमिका थी। आरोप है कि उसने मनीष बॉलर, हसन अब्बास जैदी तथा अन्य आरोपियों के साथ मिलकर लोगों को भयभीत कर उनकी भूमि पर अवैध कब्जा कराने और उससे आर्थिक लाभ अर्जित करने में सहयोग किया।
जांच के दौरान एक विधवा महिला और उसके परिवार से जुड़ा गंभीर मामला भी सामने आया। आरोप है कि गैंग द्वारा पीड़िता और उसके परिजनों को लगातार धमकाया गया। पीड़िता के भाई और देवर पर गोलीबारी किए जाने के बाद परिवार भय के कारण अन्य स्थान पर रहने चला गया। इसी दौरान उनकी भूमि पर अवैध कब्जा कर फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से उसे बेच दिया गया।
पुलिस के अनुसार, उस समय कॉन्स्टेबल पद पर तैनात शेर सिंह ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए जेल और न्यायालय में गैंगस्टर प्रवीण वाल्मीकि से कई बार मुलाकात की तथा पीड़िता और उसके परिवार पर मुकदमा वापस लेने का दबाव बनाने का प्रयास किया। आरोप है कि न्यायालय में पेशी के दौरान भी पीड़िता को अपराधी के सामने ले जाकर डराया-धमकाया गया और विवादित भूमि के अवैध सौदे से लाभ अर्जित किया गया।
आईजी निवेदिता कुकरेती ने बताया कि पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद शेर सिंह को 15 सितंबर 2025 को गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजा गया था। बाद में 7 नवंबर 2025 को उसे नैनीताल उच्च न्यायालय से जमानत मिली। गिरफ्तारी के तुरंत बाद विभागीय कार्रवाई करते हुए उसे निलंबित कर दिया गया था और तब से वह पुलिस की सक्रिय सेवा में नहीं है।
पुलिस का कहना है कि शेर सिंह के इस्तीफे को लेकर सोशल मीडिया पर प्रसारित की जा रही जानकारियों के बीच यह स्पष्ट किया जाना आवश्यक है कि वह पहले से ही निलंबित है तथा उसके विरुद्ध विभागीय एवं विधिक कार्रवाई नियमानुसार जारी है।
सवाल यह भी उड़ता है कि शेर सिंह जबपहले से अब यहां यह विभाग पर यह भी सवाल खड़े होते हैं कि यदि सिपाही पहले से ही निलंबित था तो वह वर्दी पहनकर कैसे पहुंच गया और उसका जब एक गंभीर आपराधिक इतिहास रहा है तो क्यों उसे विभाग से बर्खास्त नहीं किया गया?