देवी की आराधना से दूर होते हैं जीवन के अंधकार और अधर्म: स्वामी रसिक महाराज – Bhilangana Express

देवी की आराधना से दूर होते हैं जीवन के अंधकार और अधर्म: स्वामी रसिक महाराज

श्रीमद् देवी भागवत कथा के तीसरे दिन मधु-कैटभ वध और माँ काली की उपासना का महत्त्व सुनाया

देवी की आराधना से दूर होते हैं जीवन के अंधकार और अधर्म — स्वामी रसिक महाराज

देहरादून 26 अक्टूबर । राजेश्वर नगर फेज-1, आईटी पार्क चौराहे के सामने, सहस्रधारा रोड स्थित कम्युनिटी सेंटर में आयोजित दिव्य श्रीमद् देवी भागवत महापुराण कथा के तीसरे दिन श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव से कथा का श्रवण किया। कथा व्यास नृसिंह पीठाधीश्वर स्वामी रसिक महाराज ने माँ भगवती की महिमा का वर्णन करते हुए मधु-कैटभ प्रसंग, हयग्रीव प्रसंग, शुम्भ-निशुम्भ से संबंधित देवी महात्म्य तथा माँ काली की उपासना के महत्त्व पर प्रकाश डाला।

स्वामी रसिक महाराज ने मधु-कैटभ प्रसंग के माध्यम से बताया कि जब-जब संसार में अधर्म और आसुरी शक्तियों का प्रभाव बढ़ता है, तब-तब परमशक्ति धर्म की रक्षा के लिए प्रकट होती हैं। माँ भगवती की कृपा से असंभव कार्य भी संभव हो जाते हैं। उन्होंने हयग्रीव प्रसंग के माध्यम से ज्ञान, धर्म और सदाचार की महत्ता समझाई तथा श्रद्धालुओं को जीवन में सत्य और सद्कर्मों का मार्ग अपनाने की प्रेरणा दी।

कथा के दौरान शुम्भ-निशुम्भ प्रसंग का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि अहंकार, अन्याय और अत्याचार का अंत निश्चित है। माँ काली की उपासना के महत्त्व पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि माँ काली शक्ति, साहस, निर्भयता और दुष्ट प्रवृत्तियों के विनाश की प्रतीक हैं। उनकी आराधना मनुष्य को नकारात्मकता से दूर रहकर धर्म और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है।

स्वामी रसिक महाराज ने कहा कि श्रीमद् देवी भागवत महापुराण केवल धार्मिक ग्रंथ ही नहीं, बल्कि नारी शक्ति के सम्मान, धर्म की स्थापना और समाज में सद्भाव का संदेश देने वाला दिव्य ग्रंथ है। उन्होंने श्रद्धालुओं से परिवार और समाज में संस्कार, सेवा, भक्ति तथा मानवीय मूल्यों को बढ़ावा देने का आह्वान किया।

कथा स्थल पर श्रद्धालुओं ने माँ भगवती के जयकारों के साथ वातावरण को भक्तिमय बना दिया। आयोजक महिला कल्याण समिति, राजेश्वर नगर फेज-1 एवं क्षेत्रवासियों ने श्रद्धालुओं से कथा में सम्मिलित होकर माँ भगवती का आशीर्वाद प्राप्त करने की अपील की।