सीएम के चाबुक से बचने वाले नहीं अब “नकल वाले” दरोगा

धामी के चाबुक की “धमक” से डरेगा अब हर नकल माफिया
दूसरे का हक मारकर दरोगा बने नकलचीयो का जेल जाना निश्चित

Dehradun: “साम-दाम-दंड-भेद” सब अपना कर दरोगा बन तो गए, और उम्मीद भी यही पाले हुए थे कि आराम से नौकरी चलती रहेगी, प्रमोशन मिलते रहेंगे और कोई पकड़ने वाला नहीं होगा। पर गलतफहमी ज्यादा दिन नहीं चली और दूसरों को हवालात पर भेजने वाले अब कुछ दिनों बाद खुद हवालात की हवा खाएंगे। पूरा प्लेटफार्म तैयार किया जा चुका है और नकल के भरोसे बदन पर चढ़ी वर्दी उतरने में ज्यादा समय नहीं रह गया है।

वर्ष 2015 में हुई दरोगा भर्तियों में धांधली एवं नकल की बातें सामने आई तमाम दरोगा भी संदेह के दायरे में नजर आने लगे। जांच आगे बढ़ी तो पता चला कि ऐसे दरोगा की गिनती दर्जन से भी ऊपर है जिन्होंने नकल के भरोसे कंधों पर दो स्टार सजा लिए। नौकरी ऐसी थी कि लाखों रुपए खर्च करने के बाद भी इसकी वसूली में अधिक समय नहीं लगने वाला था, लिहाजा पैसे देकर नकल मार ली और दरोगा बन गए।

इधर देहरादून एसटीएफ ने उत्तराखंड अधीनस्थ चयन आयोग द्वारा आयोजित की जाने वाली परीक्षाओं मैं हुई नकल की पोल खोली तो 2015 की दरोगा भर्ती भी भ्रष्टाचार के इस जाल मैं लिप्त पाई गई। पकड़े गए नकल माफियाओं ने सब उगल कर रख दिया और साबित हो गया कि 2015 की दरोगा भर्ती परीक्षाओं में भी कुछ शातिर सम्मिलित है जो नकल के भरोसे दरोगा बने घूम रहे हैं।

नकल भर्ती प्रकरण में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के तेवर पूरा प्रदेश देख रहा है और अब उनका यह चाबुक उधर वहां पर भी लगने वाला है जो दूसरों का हक मारकर मजे से सरकारी नौकरी बजा रहे हैं। कड़े निर्णय लेने में अपनी महारत साबित कर चुके मुख्यमंत्री धामी ने दरोगा भर्ती प्रकरण 2015 में हुई गड़बड़ी को लेकर ना केवल विजिलेंस जांच के आदेश दिए बल्कि दोषी पाए गए दरो गांव के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने की भी मंजूरी दे दी है।