सरकारी लैब के अजब हाल, थम नहीं रहा डेंगू का डंक
Dehradun: हर मानसून की समाप्ति के बाद डेंगू से जूझना हमारी नियति बन चुकी है लेकिन एक सत्य यह भी है कि बीमारी पनपने के बाद हाय-तौबा मचाने से ज्यादा बेहतर यह है कि बीमारी से पूर्व ऐतिहासिक कदम उठाते हुए जन सहयोग की मदद से बीमारी पर अंकुश लगाया जाए। जब सरकारी व्यवस्थाएं बेकार साबित होने लगे तो जनता को खुद सड़क पर उतरना पड़ता है फिर चाहे वह अपने अधिकारों की लड़ाई हो या फिर किसी बीमारी से लड़ने के प्रयास।
एक बार फिर से डेंगू का डंक सरकारी व्यवस्थाओं को आइना दिखा रहा है। सवाल तो ये भी उठने लगे हैं की क्या डेंगू बेलगाम तो नहीं हो रहा हैं।
राज्य की राजधानी देहरादून में हालत तो पहले से ही खराब है, और अब हरिद्वार भी श्रेणी में शामिल हो रहा है। इसका अनुमान स्वास्थ्य विभाग से मिले आंकड़ों के अनुसार लगाया जा सकता है जहां प्रदेश में अब तक 1130 प्रकरण डेंगू से संबंधित सामने आए हैं जिनमें से 50% से अधिक मामले अकेले राजधानी देहरादून में ही मिले हैं।
यह सरकारी आंकड़े राजधानी देहरादून के संवेदनशील स्थिति में होने की कहानी खुद ही बयां करते हैं। हालांकि सरकारी आंकड़ों एवं हकीकत में बड़ा अंतर होने की भी बड़ी संभावना है। साफ है कि समय से पूर्व डेंगू को लेकर नगर निगम ने प्रयास नहीं किया और अब जब स्थिति काबू से बाहर हो गई है। अब जैसे तैसे फॉगिंग का काम किया जा रहा है। हालांकि इस अभियान पर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं और कहा जा रहा है कि निगम का यह कार्य सिवाय धुएं के और कुछ नहीं है। डेंगू के बढ़ रहे मामले देखकर तो यही लगता है कि निगम के प्रयास वाकई नाकाफी है तो वही स्वास्थ्य विभाग भी डेंगू के उपचार में कहीं ना कहीं हांफता हुआ नजर आ रहा है। इसका सीधा-सीधा फायदा निजी अस्पतालों एवं पैथोलॉजी लैब को हो रहा है। झोलाछाप डॉक्टरों से लेकर मल्टी सुपर स्पेशलिटी अस्पताल डेंगू पर जमकर चांदी काट रहे हैं।
मरीजों की संख्या बढ़ रही हैं तो स्थितियां हाथ से निकलती देख सरकार ने डेंगू की रोकथाम के लिए नया प्लान तैयार किया है जिसमें कोविड की तर्ज पर डेंगू पर काबू पाने के लिए रणनीति पर कार्य किया जाएगा। इसके तहत एक ही जगह से डेंगू के 10 से अधिक मरीज मिलने पर माइक्रो कंटेनमेंट जोन घोषित किए जाएंगे व इन स्थानों पर प्रत्येक घर में लार्वा नष्ट करने के लिए सफाई अभियान के साथ फॉगिंग की जाएगी। प्रत्येक कंटेनमेंट जोन में निगरानी के लिए नोडल अधिकारी नामित होंगे।
डेंगू के बढ़ते आंकड़ों को देखते हुए निगम के 100 वार्डों में डेंगू पर रोकथाम लगाने एवं लारवा नष्ट करने के लिए कार्य होगा जिसे युद्ध स्तर पर चलाया जाएगा। किसी मोहल्ले में डेंगू के 10 से अधिक मरीज मिलने पर उस क्षेत्र को माइक्रो कंटेनमेंट जोन बनाकर नोडल अधिकारी तैनात होंगे। अक्सर मानसून की समाप्ति के दौरान ही डेंगू अपना असर दिखाता है और निगम का कैलेंडर भी कहीं ना कहीं विभाग को यह जरूर दर्शाता होगा कि डेंगू से निपटने के लिए तैयारियां समय पर शुरू की जाए, लेकिन सरकारी विभाग स्थितियां बिगड़ने का इंतजार करते हैं और जब तक कार्रवाई की जाती है तब तक बीमारी अनियंत्रित हो जाती है।
बीमारी के हावी होने से पूर्व यदि समय पर एहतियाती कदम उठाए जाए तो शायद ऐसी स्थिति उत्पन्न ही न हो जो वर्तमान में देहरादून में नजर आ रही है। नगर निगम एवं स्वास्थ्य विभाग को अपने कैलेंडर तय करने चाहिए जिनमें मौसमी बीमारियों को लेकर व्यापक गंभीरता दिखाई जाए।