
हिंदू व्रतों का मजाक उड़ाना सनातन संस्कृति का अपमान: स्वामी रसिक महाराज
मातृशक्ति के सम्मान और मातृ-पितृ पूजन दिवस मनाने का किया आह्वान
देहरादून । राजेश्वर नगर फेस-वन, आईटी पार्क चौराहे के निकट सहस्रधारा रोड स्थित सामुदायिक भवन में महिला कल्याण समिति के तत्वावधान में आयोजित दिव्य श्रीमद् देवी भागवत कथा के दौरान कथावाचक नृसिंह पीठाधीश्वर स्वामी रसिक महाराज ने मातृशक्ति के सम्मान, सनातन संस्कृति की रक्षा और पारिवारिक संस्कारों के महत्व पर विशेष प्रवचन किया।
स्वामी रसिक महाराज ने कहा कि हिंदू धर्म में प्रचलित व्रतों और धार्मिक परंपराओं का मजाक उड़ाना केवल आस्था को ठेस पहुंचाना नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति और हमारी प्राचीन परंपराओं के प्रति असम्मान भी है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में माता का स्थान सर्वोच्च है। मातृशक्ति का सम्मान करना, परिवार के संस्कारों को जीवित रखना और धार्मिक परंपराओं के प्रति श्रद्धा बनाए रखना प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य है।
उन्होंने आगामी 25 दिसंबर को मातृ-पितृ पूजन दिवस के रूप में मनाने का आह्वान करते हुए कहा कि इस दिन बच्चों और युवाओं को अपने माता-पिता के प्रति प्रेम, कृतज्ञता और सम्मान व्यक्त करने के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए। उन्होंने सरकार से भी आग्रह किया कि 25 दिसंबर को मातृ-पितृ पूजन दिवस के रूप में घोषित करने की दिशा में विचार किया जाए, ताकि समाज में माता-पिता के सम्मान और पारिवारिक मूल्यों को और अधिक प्रोत्साहन मिल सके।
इस अवसर पर स्वामी रसिक महाराज ने उपस्थित माताओं और श्रद्धालुओं को करवा चौथ व्रत की पौराणिक कथा भी सुनाई। उन्होंने व्रत-उपवास की धार्मिक भावना, पति-पत्नी के पारस्परिक विश्वास, परिवार की सुख-समृद्धि और नारी की श्रद्धा के महत्व पर प्रकाश डाला।
कथा में उपस्थित महिलाओं एवं श्रद्धालुओं ने प्रवचन को श्रद्धापूर्वक सुना और स्वामी रसिक महाराज से आशीर्वाद प्राप्त किया। कार्यक्रम में मातृशक्ति के सम्मान, सनातन संस्कारों के संरक्षण और परिवार में प्रेम व सद्भाव बनाए रखने का संदेश दिया गया।