अनावश्यक पेट भरने से ज्यादा जरूरी है शरीर को पोषक तत्व की पूर्ति, अधिक खाने की आदत बना रही बीमार

खाने की गलत आदतों से बिगड़ रहा है शरीर का संतुलन, पोषक तत्वों की अनदेखी

नमक एवं चीनी के प्रयोग को लेकर NIN ने दूर किये कई मिथक

सुबह की अपेक्षा दिन की धूप विटामिन “डी” का सबसे प्रभावी स्रोत, सनस्क्रीम का प्रयोग घातक 

NIN के वैज्ञानिकों ने बताई अनाज में पोषक तत्वों की खूबियां

उत्तराखंड के पत्रकारों ने सालार जंग म्यूजियम का भी किया दौरा

हैदराबाद: “सिर्फ पेट भरना ही हमारी प्राथमिकता नहीं होनी चाहिए बल्कि इस बात पर अधिक ध्यान देना चाहिए की जो भजन हम ग्रहण कर रहे हैं क्या वह हमारी शरीर की सभी आवश्यकताओं को पूरा कर रहा है या नहीं”?

हैदराबाद स्थित राष्ट्रीय पोषण संस्थान अनुसंधान विभाग अनाज एवं अन्य खाद्य पदार्थों में मौजूद पोषक तत्व पर निरंतर शोध करता है। संस्थान शरीर की आवश्यकताओं के अनुसार खाद्य पदार्थों के प्रकार और उसमें मौजूद विटामिन,प्रोटीन एवं न्यूट्रिशन के साथ-साथ अन्य पोषक तत्वों के वर्गीकरण पर भी निरंतर कार्य कर रहा है। संस्थान के वैज्ञानिकों ने हमारी दिनचर्या के भजन और शरीर के लिए उसकी जरूरत पर प्रकाश डाला और कई ऐसी धारणाओं को भी गलत साबित किया जो हम अपने बड़े बुढो से सुनते आ रहे हैं।

राष्ट्रीय पोषण संस्थान (एनआईएन) हैदराबाद के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉक्टर सुब्बाराव एम. ने बताया कि आज हम जो कुछ खा रहे हैं वह मात्र एक जीवन यापन लायक है लेकिन एक स्वस्थ शरीर के लिए परिपूर्ण नहीं है। स्वस्थ शरीर को एक निश्चित मात्रा में पोषक तत्वों की जरूरत होती है जो आज हमारी दिनचर्या और खाने-पीने के बदलते स्वभाव के कारण प्रभावित हो रही है। यही कारण है कि जहां पहले संक्रमित बीमारियों से अधिक संख्या में लोग मारे जाते थे वहीं अब खान-पान की बिगड़ी आदतों से गैर संक्रमित बीमारियां जैसे डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, किडनी व लीवर की बीमारियां पनप रही है।

उन्होंने कई पुरानी बातों को लेकर भ्रम की स्थिति को भी स्पष्ट किया और कहा कि जहां विटामिन डी के लिए सुबह की धूप को सबसे बेहतर मानते हैं वह गलत है जबकि सुबह 11 से 12 की धूप में शरीर को सबसे अधिक विटामिन डी की आपूर्ति की जा सकती है लेकिन इसके लिए जरूरी है कि लगभग 25% शरीर के हिस्से में धूप पड़नी चाहिए। शरीर में विटामिन डी की कमी का सबसे बड़ा कारण सनस्क्रीन का प्रयोग तथा अधिक समय तक के लिए बंद कमरों में रहने की आदत है।

खानपान की आदतों में बदलाव की नसीहत देते हुए उन्होंने कहा कि चीनी व नमक का प्रयोग कम से काम करना चाहिए तथा 2 साल से कम उम्र के बच्चों को चीनी से दूर रखने का प्रयास करना चाहिए। डॉ सुब्बाराव के अनुसार बाजार में मिलने वाला आयोडीन नमक ही सबसे बेहतर है और जो भ्रम हमने समुद्री नमक या अन्य दूसरे नमक को लेकर पाले हुए हैं वह अधिक प्रभावित नहीं है।

फ्रिज के में रखे गए खान के प्रयोग के बारे में उन्होंने बताया कि चार डिग्री तक खाना दो से तीन दिन तक सुरक्षित रह सकता है और जब भी दोबारा इसे खाने की आवश्यकता हो तो जरूर के अनुसार निकाल कर ही गर्म करना चाहिए। पूरे खाने को गर्म कर और पुनः उसे ठंडा कर फ्रिज में रखना खाने के लिए पोषक तत्व को समाप्त कर देता है।
आज युवा अपनी सेहत बनाने के लिए वैकल्पिक प्रोटीन का प्रयोग करते हैं जो कि स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है जबकि जो भोजन हम ग्रहण कर रहे हैं उसमें प्रोटीन, न्यूट्रीशन एवं विटामिन संयुक्त पदार्थ शामिल कर प्रोटीन की पूर्ति की जा सकती है। प्रोटीन केवल चिकित्सक की सलाह पर ही लेना चाहिए और अपने पूरे दिन भर में एक व्यक्ति को 5 ग्राम से ज्यादा नमक का सेवन नहीं करना चाहिए। इसी तरह एक वयस्क व्यक्ति को दिन में लगभग चार लाइटर अपनी अलग-अलग माध्यम से ग्रहण करना चाहिए। उन्होंने आरओ के पानी को स्वास्थ्य के लिए खराब बताया और कहा कि केवल कैंडल वाले आरो का पानी ही पीने योग्य है अन्यथा जो सामान्य पानी मिल रहा है उसी का प्रयोग उबालने के बाद ठंडा कर किया जाना स्वास्थ्याप्रद है।

इससे पूर्व उत्तराखंड से हैदराबाद स्टडी टूर पर गए 15 सदस्यों के पत्रकार दल ने राष्ट्रीय पोषण संस्थान की निदेशक डॉ भारती कुलकर्णी से भी भेंट की। डॉक्टर कुलकर्णी ने बताया कि संस्थान में 50 से अधिक वैज्ञानिक खाद्य पदार्थों में मौजूद पोषक तत्व के महत्व पर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमें पोषक तत्वों को अपनी प्राथमिकता में रखना चाहिए और ऐसा भोजन अपनी दिनचर्या में शामिल करना चाहिए जो हमारे शरीर के लिए पोषक तत्वों की पूर्ति करते हो।
डॉ कुलकर्णी ने बताया कि राष्ट्रीय पोषण संस्थान उत्तराखंड के मिलेट्स पर भी शोध करेगा जिसके लिए कृषि मंत्रालय से उन्हें निर्देश प्राप्त हुए हैं।
इस स्टडी टूर के कंडक्ट अधिकारी संजीव सुंदर्याल (पीआईबी) देहरादून ने बताया कि हैदराबाद के चार दिवसीय स्टडी टूर के तहत केंद्र सरकार के विभिन्न महत्वपूर्ण विभागों की कार्यशैली एवं उनकी उपयोगिता को लेकर पत्रकारों को जानकारी दी जा रही है।
आज ही पत्रकारों के दल ने हैदराबाद स्थित सालार जंग म्यूजियम का भी दौरा किया।